subramanyam swami

सुब्रमण्यम स्वामी वन मैन आर्मी subramanyamswami one man army - 

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स्वामी 



सुब्रमण्यम स्वामी भारतीय राजनीति का वो चेहरा है जो अपनी बात बेबाक तरीके से रखने और उन्हें सिद्ध करने के लिए  कोर्ट का दरवाजा खटखाना भी नहीं चूकते। यहाँ तक की उनकी अपनी पार्टी बीजेपी भी उनके सवालो से परेशान  हो जाती है और बगले झाकने लगती है। सरकार के शुरूआती दौर में ही उन्होंने अरुण जेटली को वित्त मंत्री बनाये जाने पर सवालिया निशान लगाए थे और एक वकील को इतने बड़े देश की अर्थव्यवस्था तहस - नहस  करने का कारण बताया था। उनके बाद यशवंत सिन्हा ने भी वित्त मंत्री की काबिलियत पर प्रश्न चिन्ह लगाए थे। जो की स्वामी  की बातो का समर्थन था। इसका एक कारण ये भी है की स्वामी खुद एक अर्थशास्त्री है , उन्होंने हॉवर्ड यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है और  विश्व के  नामी अर्थशास्त्रियों के साथ शोध कार्य भी किया है।   हमने भी देखा की सरकार कैसे देश की अर्थव्यवस्था के नाम पर आम आदमी पर करो का बोझ बढाती जा रही है। और उसके कई फैसले गलत सिद्ध हुए है। स्वामी 1990  -  1991 तक भारत के वाणिज्य ,न्याय और विधि मंत्री रह चुके है और साथ में अंतराष्ट्रीय व्यापार आयोग के अध्यक्ष भी।


सुब्रमणयम  स्वामी के परेशां करने वाले सवालो से राहुल गाँधी भी अछूते नहीं रहे है पिछले साल उन्होंने राहुल गाँधी से उनकी जाति को लेकर ही सवाल पूछ लिया था की वे हिन्दू है या ईसाई , सुनंदा पुष्कर केस में उन्होंने शशि थरूर पर ही अपने बाण चला दिए थे। नेशनल हेराल्ड को लेकर स्वामी अभी भी सोनिया  गांधी के पीछे पड़े हुए है। 


स्वामी के पिता जी भारतीय सांख्यिकीय सेवा के अधिकारी थे और इसके निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे इसलिए स्वामी ने भी अर्थशास्त्र से अपनी पढाई शुरू की। स्वामी आईआईटी में प्रोफ़ेसर भी रह चुके है और अपनी विचारधारा के कारण इंदिरा गाँधी की आँखों की किरकिरी भी इंदिरा गाँधी के कारण ही उन्हें अपनी नौकरी गवानी  पड़ी और तभी से स्वामी राजनीति में सक्रिय भी हुए। आपातकाल के दौरान स्वामी अपनी गिरफ़्तारी के पूर्व ही भूमिगत हो गए थे।  उन्होंने उस दौरान भी निर्भीकता से संसद में पहुंच कर अपनी बात रखने का साहस दिखाया था जब कोई इंदिरा गाँधी के विषय में बात करने से भी कतराता था। 

वैसे तो स्वामी के विषय में पूरी जीवनी कही भी मिल जाएगी। पर जरुरी है स्वामी की विचारधारा और सच के प्रति उनकी निष्ठां और निडरता को समझने की । इसी विचारधारा को लेकर स्वामी ने अपनी पार्टी भी बनाई थी पर लोकसभा चुनावों से पूर्व उसे भारतीय जनता पार्टी में विलय करा दिया था जिससे की नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एक सर्वजनहितकारी सरकार का गठन हो सके। स्वामी आज भी उन मुद्दों पे खुलकर बोलते है जिनपे आम नेता बात करने से भी कतराते है। स्वामी की छवि कुछ हद तक हिंदुत्व वादी की भी है इसलिए रामसेतु से लेकर राम मंदिर के निर्माण में भी स्वामी का लगाव देखने को मिलता है। राम मंदिर के निर्माण को लेकर स्वामी बीजेपी से भी सवाल पूछते नजर आ जाते है ये स्वामी ही है जिन्हे वन मैन आर्मी का दर्जा दिया जा सकता है। इसलिए आजकी युवा पीढ़ी में भी स्वामी के चाहने वालो की अच्छी संख्या है। जो इस देश के राजनीति  और समाज में होने वाले घटनाक्रम पे अपनी बात रखने और उसको सही साबित करने के लिए प्रयासरत है। ताकि देश की भ्रष्ट और संवेदनहीन व्यवस्था को सुधारा जा सके।  


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