Pappu paas ho gaya


पप्पू पास हो गया - pappu paas ho gaya 



मैं  और पप्पू बचपन से ही एक साथ स्कूल मे  साथ - साथ पढ़ते आये थे , शुरुआत मे जब पप्पू चौथी कक्षा का विद्यार्थी था  तभी मैने  विद्यालय मे दाखिला लिया था . मेरे चौथी कक्षा मे आने तक पप्पू ने मेरा इंतजार बड़ी बेसब्री से किया था . हालांकि पप्पू के एक दो सब्जेक्ट को छोड़ कर बाकी सबमे 0 नंबर ही थे . पर पप्पू हार मानने
pappu
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वालो मे से नही था, हर बार कम नंबर आने के बाद वो कड़ी साधना मे जुट जाता था . पर  साधना करने के लिये उसे अपना घर उपुक्त नही लगता इसलिये वो अपने मामा के घर शिमला  या मौसी के पास  मसूरी चला जाता था. 

पप्पू जब लौट के वापस आता तो उसकी साधना उसके चेहरे से सॉफ झलकती थी , हाँ  तो मुझे याद है की जब मैं कक्षा चार मे पहुँचा तो सरकार की तरफ से एक नई शिक्षा नीति आ गई की आठवीं तक के किसी विद्यार्थी को फेल नही किया जायेगा, मैं बड़ा प्रसन्न हुआ , मुझे लगा की जरूर पप्पू की साधना का फल है जो भगवान के साथ सरकार ने भी सून ली .

अब तो में भी पप्पू का मुरीद हो गया और पप्पू के साथ अपनी घनिष्टता बढ़ा ली . पप्पू अपने लंच बॉक्स मे हमेशा मूली के परांठे और मिर्चे का आचार लाया करता था . वो कहता था की मिर्च से गला सॉफ होता है और मूली से पेट . अक्सर लंच के बाद पूरी कक्षा के विद्यार्थी अपने नाक पे रूमाल लगा लिया करते थे शायद कही से विषैली गैस का  रिसाव होने लगता .

आठवी कक्षा के बाद नौवी कक्षा मे अचानक से पप्पू के अंदर प्रवचन देने की प्रवित्ति उतपन्न हो गई मुझे लगा शायद मिर्चे ने पप्पू का गला कुछ ज्यादा ही सुरीला बना दिया था , कई बार क्लास की लड़कियां कन्फ्यूज हो जाती . पर पप्पू के प्रवचन मे आंकड़े अक्सर ही इधर से उधर हो जाया करते थे कभी अकबर  की रानी एलीजाबेथ हो जाती तो कभी पप्पू बाबर का युद्ध सम्राट अशोक से करा देता.

पर इन सबमे पप्पू का कोई दोष नही था सब गलती किताबो की ही थी जिनमे इतने रानी राजाओ का जिक्र था , इसी से खिसिया के एक बार तो पप्पू ने  किताब ही फाड़ दी  जबकि अगले दिन उसी विषय की परीक्षा थी .बेचारा पप्पू किताब की वजह से  फिर फेल हो गया और मैं पास होके अगली कक्षा मे पहुंच गया ,उसके बाद तो कभी - कभी ही पप्पू से मुलाकात हो पाती थी. पर पप्पू के चर्चे जरूर सुनने को मिलते थे , समय का पहिया चलते गया और  पढ़ाई पूरी करने के बाद  आम आदमी की तरह मैं भी  नौकरी मे लग गया. पर पप्पू ने उसी विद्यालय मे ही मन लगा लिया था .
इधर कुछ दिनो से पप्पू का ज़िक्र अचानक ही  बढ गया  था , कई लोगो ने बताया की पप्पू अपने अमेरिका वाले फूफा के यहाँ गया था वहा उन्होने अनेक विद्वान लोगो से उसकी मुलाकात कराई पप्पू से बहुत से प्रवचन दिलवाये जिससे पप्पू वहा अपना झंडा गाड़ के आया है. यहाँ आने पे पप्पू मे फिर से नई उर्जा झलकने लगी थी और इस बार पप्पू ने बिहार से फार्म भरकर हाइ स्कूल की  परीक्षा न केवल  पास कर ली  बल्कि पूरा बिहार ही  टॉप कर दिया . 
  
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