amitabh aur raajneeti

                                              

अमिताभ बच्चन और राजनीति  - amitabh bachhan aur rajneeti 



amitabh aur raajneeti
ab 
अमिताभ बच्चन एक ऐसी शख्सियत है जिनकी प्रसिद्धि अपने से सामानांतर अन्य कलाकारों से काफी ज्यादा है। 

ट्विटर से लेकर फेसबुक तक अनुयायियों की संख्या सर्वाधिक और  अदाकारी लाजवाब। मोदी सरकार में गुजरात के ब्रांड एम्बेसडर  और प्रधानमंत्री  मोदी के चहेते ।  

पिछले कुछ दिनों से ट्विटर पर राहुल गाँधी से लेकर कांग्रेस के अन्य नेताओ को अचानक से अनुसरण करने लगते है।  कांग्रेस पार्टी से अमिताभ बच्चन का पुराना  नाता रहा है राजीव गाँधी और अमिताभ की दोस्ती जग जाहिर थी। 

इसी दोस्ती के वास्ते उन्होंने सन 1984 में इलाहाबाद से लोकसभा का चुनाव लड़ा था और उस दौर के कद्दावर नेता हेमवंती नंदन बहुगुणा को बुरी तरह से हराया था. इलाहबाद संसदीय क्षेत्र का वह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था अमिताभ ने चुनाव में 68.2 प्रतिशत के अंतर से जीत हासिल की। पर अमिताभ का राजनीतिक कॅरियर बहुत लम्बा नहीं चला बोफोर्स घोटाले में अखबारों में अपने परिवार का नाम आने पर अमिताभ ने 3 साल बाद ही सांसदी से अपना त्याग पात्र दे दिया। इसी साल अमिताभ की फिल्म शहंशाह  सिनेमाहाल में आई थी।  मुंबई में शिवसेना ने इसका काफी विरोध किया था। बोफोर्स का जिन्न  एक ऐसा जिन्न  है जो  सन  1989 में में कांग्रेस को ही  ले डूबा। 

हालांकि सन 2012 में स्वीडन की जांचकर्ता टीम ने अमिताभ बच्चन को क्लीन चिट  दे दिया था।पर इतने सालो तक उन्हें बोफोर्स से बदनामी ही मिली , बोफोर्स का दर्द अमिताभ ने अपने ब्लॉग  में भी किया था।उन्होंने लिखा की 25 साल तक  वो और उनका परिवार एक साजिश का शिकार रहा जिस वजह से उनको मानसिक यातना झेलनी पड़ी। 

अमिताभ बच्चन की ज़िन्दगी में एक दौर ऐसा आया जब  90 के दशक के बाद वे अपनी फिल्मो में कोई विशेष प्रदर्शन नहीं कर पा  रहे थे उसी समय उन्होंने abcl(अमिताभ बच्चन कार्पोरेशन लिमिटेड ) की स्थापना की कंपनी ने तेरे मेरे सपने नाम से अपनी पहली फिल्म  भी बनाई थी पर फिल्म  कुछ खास नहीं कर पाई  , कुछ और फिल्मो का भी निर्माण हुआ जिनमे अमिताभ बच्चन अभिनीत मृत्युदाता भी थी यह फिल्म भी कुछ ख़ास नहीं कर पाई इस तरह धीरे - धीरे अमिताभ बच्चन की कम्पनी भारी घाटे में जाने लगी.

बहुत कम  लोगो को पता होगा की  उनकी कंपनी ने मिस वर्ल्ड का भी प्रयोजन किया था जिसमे ख़राब प्रबंधन के कारण उन्हें काफी क्षति उठानी पड़ी और धीरे - धीरे इन्ही घाटों के चलते   बात उनके घर की नीलामी तक आ पहुंची पर अमिताभ का साथ एक बार फिर उनके मित्र अमर सिंह ने दिया बदले में अमिताभ ने उत्तर प्रदेश में उनकी समाजवादी पार्टी का प्रचार प्रसार किया , और उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाया। समाजवादी पार्टी से ही जया  बच्चन को राज्य सभा भेजा गया। और अब तक वे हर बार समाजवादी पार्टी से ही राज्यसभा पहुँचती आ रही है। 

कौन बनेगा करोड़पति से अमिताभ बच्चन की किस्मत ने एक बार फिर चमकना चालू किया उनकी शैली लोगो को भाने  लगी और धीरे - धीरे घर - घर में अमिताभ बच्चन ने फिर अपनी पहुँच और  प्रशंषको की संख्या में इजाफा करना प्रारम्भ  किया। उसी समय शाहरुख़ खान और अमिताभ बच्चन के बीच टकराव की पृष्ठभूमि पर आधारित मुहब्बतें प्रदर्शित हुई जो की सुपर - हिट साबित हुई और एक बार फिर अमिताभ का फिल्मी कॅरियर भी वापस पटरी  पर आने लगा। 

समाजवादी पार्टी की सरकार में ही अमिताभ पर बाराबंकी जिले में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दलित किसानो की जमीन अपने नाम करने का आरोप लगा और अमिताभ को कोर्ट का सामना भी करना पड़ा इसी जमीन पर उन्होंने अपनी बहु के नाम से ऐश्वर्या राय  बच्चन महाविद्यालय बनाने की घोषणा भी की थी। ऐसा ही एक और फर्जी मामला महाराष्ट्र के पुणे में भी उजागर हुआ। 


ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड टैक्स हैवन देशो में से एक माना  जाता है  . इन्ही टैक्स हैवन देशो में जमा पूंजी को पनामा पेपर्स ने उनके जमाकर्ताओं के नाम के साथ उजागर किया है , पनामा पेपर्स समूह खोजी पत्रकारिता का एक समूह है जो इस तरह के मामलो को उजागर करता है उसकी लिस्ट में ऐसे 500 भारतीयों के नाम थे जिनमे से ३०० की पहचान कर ली गई है। 


इन्ही में से एक नाम अमिताभ बच्चन का था। इन देशो में फर्जी कंपनियों का निर्माण करके कला धन का निवेश किया जाता है। इन्ही कंपनियों के डाइरेक्टर में अमिताभ बच्चन का भी नाम था। प्रेस और जाँच एजेंसियो  द्वारा पूछे जाने पर उन्होंने इसमें अपनी संलिप्तता से इंकार कर दिया और इसे अपने नाम का दुरूपयोग बताया। इन्ही वजहों के चलते  एक बार फिर उनका झुकाव समाजवादी पार्टी से भाजपा की और होने लगा हालाँकि वे पूर्व में उत्तर - प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के बाद गुजरात के भी ब्रांड एम्बेसडर बने जहा मोदी मुख्यमंत्री थे। 

पनामा पेपर में नाम आने के समय ही भाजपा सरकार के एक समारोह में उनके होस्ट को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े किया जिसमे की प्रधानमंत्री मोदी भी शामिल  थे। कांग्रेस ने कहा की अमिताभ बच्चन के खिलाफ केंद्र की जाँच एजेन्सिया जाँच कर रही है ऐसे में प्रधानमंत्री का उनके साथ दिखना इन जाँच एजेंसियो को गलत सन्देश जायेगा । 

हालांकि बाद में अमिताभ बच्चन ने समारोह में अपनी मौजूदगी से इंकार कर दिया। पनामा पेपर की जाँच में शामिल अंतराष्ट्रीय टीम का हिस्सा भारत भी है। 

पनामा के बाद एक और पेपर लीक मामला ऐसा आया जिसमे अमिताभ का नाम शामिल था ये था पैराडाइज़ पेपर्स लीक। पैराडाइज़ पेपर्स लीक  एक फर्जी कम्पनी बरमूडा  के माध्यम से कला धन को ठिकाने लगाने की व्यवस्था थी जिसमे अमिताभ बच्चन सिलिकॉन वैली  के नवीन चड्ढा के साथ शेयर  होल्डर थे।

इतने सारे विवादों और अमिताभ बच्चन की बदलती राजनीतिक निष्ठां कही न कही उनकी नियति पे संदेह जाहिर करती है। सत्ता के बदलते रुख के साथ उनकी निष्ठां भी बदलती रही है। आज वही अमर सिंह जो अमिताभ बच्चन को अपना बड़ा भाई मानते थे और अमिताभ बच्चन उन्हें अपना छोटा भाई राजनीतिक हाशिये का शिकार है और अमिताभ उनके आसपास कही खड़े नहीं दिखाई देते।  जिस कांग्रेस से उन्हें बोफोर्स जैसा दाग मिला और राजीव गाँधी के बाद जिससे उन्होंने अपना रिश्ता ख़त्म कर लिया उन्ही राजीव गाँधी के पुत्र को वे अर्से बाद ट्विटर पर फालो करते है। शायद कही उन्हें 2019 की हवा बदलते हुए तो नहीं दिख रही है जिसमे उनका राजनीतिक हित सुरक्षित रह सके। 

वर्तमान समय में अमिताभ बच्चन के प्रशंसकों की संख्या अच्छी खासी है ,लेकिन इतने सारे प्रशंसकों के होने के बावजूद अमिताभ बच्चन का अक्षय कुमार और सलमान खान की तरह कोई बड़ा सामाजिक सरोकार नहीं है , इस उम्र में भी अनेक तरह के विज्ञापनों को करना पैसे के प्रति उनकी  लालसा साफ़ तौर  पे इंगित करती है हालांकि उनके प्रशंसकों को ये बात बुरी लग सकती  है पर उन्हें भी इन सितारों की चमक के पीछे की वास्तविकता को समझना चाहिए। और उनकी बदलती नियति को लेकर समीक्षा अवश्य करनी चाहिए। 

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holi hai




बुरा ना मानो होली है bura na mano holi hai



बुरा न मानो  होली है
साथ में रंग ,अबीर  और भांग की गोली है 

छायी है मस्ती चारो ओर 
खेलो होली मचाओ शोर 
पिचकारी में भर  ली रंग है
आज तो पप्पू ,फेंकू और बुआ भी अपने संग है 

बम - बम भोले बोल के 
पी गए भांग घोल के 
अब तो कुत्ता भी दिखे है हाथी 
और बकरी से बोलू चल मेरे साथी 

पिछले बरस पप्पू संग खेली थी होली  कुरता फाड़ 
अबकी बार मोदी सरकार 
पोतो गोबर लगाओ जोर 
भागने न पाए बैंक चोर 

बुआ भतीजे के बीच छिड़ी देखो  होली की जंग 
भागे बुआ  दौड़ाये भतीजा - लेके हरा रंग 

केसरिया रंग लेके आये  है सरकार
विरोधियो में मची है हाहाकार 
रंगने चले है पूरा देश 
पप्पू क्यों भागे है विदेश  

लालू बोले चालू से 
बुरबक  हमको इतने दिनों तक  क्यों बनाया है 
जिससे चिढ़ता  था 
उसी केसरिया से खुद को रंगवा के आया है 

आप की होली है सबसे मजेदार 
मारो थप्पड़ लगाओ रंग 
और राज्यपाल  के साथ करो जंग  

चाची  420 ने चलाई नई  पिचकारी है 
आप को बुलाकर अपनी शामत बुलाई है 

अलग - अलग है रंग यहाँ 
अलग - अलग है चाल 
रंगो में बंटा समाज है 
रंगो में बंटा है मजहब 
हर रंग की अलग कहानी है 
बाकि बातें तो आनी  जानी है

होली के इस त्यौहार में 
सारे रंगो  के साथ में 
खेलेंगे हम दिल से होली 
भाड़ में जाएं पप्पू फेंकू और इनकी टोली। . 



                                                                                                      
raijee
लेखक 

  

fenku chachha ki holi


फेंकू चच्चा की होली fenku chachha ki holi - 



होली का त्योहार ज्यो ज्यो पास आता जा रहा है वैसे ही धीरे - धीरे माहौल भी रंगीन होते जा रहा है , हमारे गाँव के फेंकू चच्चा जबसे प्रधान बने है तबसे इस त्योहार का एक अलगे मजा हो गया है. 2014 की होली मे तो उन्होने कईयो को रंग दिया था उस साल उन्होने किसी को नही छोड़ा पप्पू तो पहचाने मे नही आ रहा था वो तो उसकी मम्मी ने बंदर छाप साबुन से रगड़ - रगड के उसे नहलाया तो जाके उसका मुखड़ा दिखाई दिया . लेकिन तबसे पप्पू गाँव मे दिखाई नही दिया.उसे दुसरे गांव में होली मनाने में ही मजा आता था. 

fenku chachha
फेंकू चच्चा 
साइकल वाले नरम चच्चा और उनका बेटवा दुन्नु  की तो साइकल तक पे चच्चा ने अपना रंग चढ़ा दिया था . चच्चा को केसरिया रंग बड़ा प्रिय है इसलिये होली के दिन चच्चा गुलाल तक केसरिया रंग का ही लाते है . चच्चा बता रहे थे की कैसे वे एक बार अमेरिका गये और वहा वे ट्रॅंप के साथ होली खेल के आये थे.तब ट्रंप  एकदम करिया हुआ करता था चच्चा ने ट्रम्प पर ऐसा सफेदा पोता की आजतक छुटबे नहीं किया इसीलिए ट्रम्प इतना गोरा है।  तब से ट्रॅंप भी होली और चच्चा दोनों  का दीवाना हो गया था . हमारे गाँव मे तो चच्चा की होली देखने दूर दूर तक से लोग आते थे .होली के दिन एक ठो बड़का गड़हा खोद के उसमे कीचड और गोबर दोनों से भर दिया जाता था और गांव के सबसे मनबढ़ लइका  को उसमे उठा के पटक  दिया जाता था  ताकि उ अपनी मनबढ़ई भुला सके। 

चच्चा होली के दिन कई तरह के पकवान भी बनवाया करते थे जिसमे गुजिया से लेकर मालपुआ तक सब होता था. और हां पकौड़ी भी। 

 हमारे गाँव मे एक नकचढ़ी बुआ भी थी जिनपे रंग लगाना साक्षात अपनी शामत बुलाना था , बुआ को हाथियो से बड़ा प्यार था इसलिये बुआ के घर मे हाथियो के कई सारे पुतले थे . बुआ के बोलने का अंदाज भी सबसे निराला था , पिछली होली मे गाँव के एक लड़के ने साइकल पे चढ के बुआ पे रंग डालने की कोशिश की थी ताकि भागने मे आसानी हो पर पर गाँव का ही पप्पू उससे आके भीड़ गया . साइकल के साथ दोनो के हाथ पांव टूटे वो अलग से . हमारे गाँव मे होली के दिन रस्सी खींच प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है अभी पिछली ही बार चच्चा अकेले ही मोर्चा संभाले हुए थे और दूसरी तरफ दूसरे गाँव के चालू प्रसाद और विनीत कुमार थे दोनो ही चच्चा के कट्टर विरोधी थे पर चच्चा ने ऐसी रस्सी खींची की विनीत चच्चा के पास आ गिरे और चालू पीछे नाले मे तबसे चालू चच्चा को गरियाते फिर रहे है . इस बार तो चच्चा सबके निशाने पे है सबने अपनी अपनी पिचकारी चच्चा के लिये तैयार कर रखी है . बुआ तो इस बार असली हाथी पर चढ के चच्चा को रंग लगाने वाली है अब्बे से कई ठो बाल्टी तैयार कर ली है।  वैसे एक बार चच्चा हांथी की सूंड मे सुई घुसा चुके है . उसी सुई से उन्होने साइकल भी पंचर की थी और उसी से पप्पू के हाथ मे खुजली भी की थी . देखना है चच्चा इस बार कैसी होली खेलते है  और चच्चा इस बार कौन सी पिचकारी से रंग के साथ और क्या क्या फेंकते है या बाकी सब चच्चा का क्या हाल करते है इहे तो एक त्यौहार है जिसमे कपडा भी फाड़ देंगे तो कोई बुरा नहीं मानेगा इसीलिए सब कहता है -  बुरा ना मानो होली है .


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tera jana



main aur wo

तेरा जाना (कविता )-tera jana (poetry)


शाम होने लगी ज़िन्दगी की अब 
रात का दर हमें अब सताने लगा 

तन्हा  हम भी थे , तन्हा तुम भी थी - मगर
सैलाब आंसुओ का, अब रोका जाने लगा 

 तुम  कहती रही खुद से ही मगर  - 2 
गम अपना कभी हमें बताया नहीं 

सांस धीमी पड़ी नब्ज थमने लगी 
दर्द चेहरे पे तुमने दिखाया नहीं 

वक़्त कम  सा पड़ा हम थम से गए 
कुछ हमारे समझ में भी आया नहीं 

आ गई वो घडी जब तुम चल सी पड़ी 
अकेले हम थे यहाँ, और थी आंसुओ की लड़ी 
खुदा ने भी हम पे तरस खाया नहीं 
हम समझ ना सके हो रहा है ये क्या -2 
और तुमने कभी हमें समझाया नहीं 

चली गई तुम कहा ,रह गए हम यहाँ 
ये जमाना हमें रास आया नहीं 

अब तो अकेले है हम ,और है तेरा गम 
एक लम्हा नहीं जब तू याद आया नहीं 

शाम होने लगी. .. ... ....... ......... ....... 


main aur wo
लेखक 



poem on politics






राजनीति पे कविता poem on politics






जबसे आप मशहूर हुए कई अपने आप से दूर हुए

अब तो आप ही आप है दिल्ली  मे
जिक्र होता है आपका अक्सर लोगो की खिल्ली मे 



काला धन और भ्रष्टाचार अब हो गई इनकी बातें बेकार

सफेद धन है सदाबहार
लेके भागो सात समंदर पार



सेवक अपना छोड़ तिजोरी घूमे देश विदेश

जनता बोले त्राहिमाम चोरो की तो हो गई है ऐश
जनहित के नाम पे जन - जन को देखो रोना आया है
अच्छे दिनो की आस मे तूने बहुत छकाया  है.



पकौड़ा तो छनवा चुका  ,बी ए - एम ए पास को

अब क्या मुंह दिखलाउंगा ,घर पे जाके अपनी सास को



पप्पू पास नही होता राजनीति के इम्तिहान मे

इसके सिवा कोई और नही मिलता इनको सारे जहाँ  मे
खूब लूटा इनकी मम्मी ने अपने देश को
मन करता है भेज दे इनको अब तो परदेश को



विकास मिले तुम लोगो को तो कही से ढूंढ लाना

बची हो इंसानियत तुममे तो उसे
भारत मा का पता बताना



लहूलुहान ना करना इस भारत मां  को

उसके ही बच्चो के खून से
ताज रखो तुम्ही
हमे रहने दो बस सुकून से ........







raijee
लेखक 
















king modi

मोदी राजा - king modi 


बचपन मे एक खेल होता था जिसमे चार पर्चिया बनाई जाती थी , राजा ,मंत्री ,चोर और सिपाही सबसे ज्यादा नंबर राजा की पर्ची आने वाले को मिलता था . और उसे अपने मंत्री को चोर को पकड़ने का आदेश देना पड़ता था , मंत्री, चोर और सिपाही मे से अनुमान लगा कर बताता था की कौन चोर और कौन सिपाही है , गलत अनुमान पर मंत्री के नंबर काट लिये जाते थे, इस खेल ने मौजूदा भारतीय राजनीतिक हलचल जिसमे चोरो की बढ़ती संख्या के विषय मे सोचने पर मजबूर कर दिया है . चोरो की नवीन सूची मे नाम जुड़ा है नीरव मोदी का जिन्होने बॅंको मे जमा आम आदमी और सरकार के पैसो मे करीब 11000 करोड़ की सेंध लगाई है. और हमारे देश की भ्रष्ट व्यवस्था की वजह से वो ऐसा करने मे कामयाब हुआ है .


king modi
किंग मोदी 

 पंजाब नैशनल बैंक जो की पहला भारतीय बैंक होने के गौरव से सम्मानित है ने अपनी प्रतिष्ठा धूमिल की है . इससे इंकार नही किया जा सकता की बैंक की अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक इस भ्रष्टाचार मे संलिप्त थे . भ्रष्टाचार से याद आता है की इस देश के प्रधान सेवक ने कहा था की वो विदेशो मे जमा काला धन वापस लायेंगे मुझे लगता है की वो ये बताना भूल गये थे की अपने देश का सफेद धन वो विदेश लेकर भागने देंगे ,जैसे माल्या से लेकर नीरव मोदी तक बहुत ही आसानी से देश का सफेद धन लेकर विदेशो मे भाग रहे है उससे तो लगता है की आने वाले दिनो मे इसका प्रचलन काफी बढ़ने  वाला है . हमारे देश के प्रधान सेवक जिनको खुद विदेश से हद से ज्यादा  लगाव है देश की संपत्ती और धन को सुरक्षित रख पाने मे असमर्थ है . एक मुद्दा जिसने इस सरकार को सत्ता मे आने मे मदद की और जिसे सभी जनलोकपाल कहते है कही गुम सा हो गया है ये बात कही ना कही प्रधान सेवक के कथनी और करनी मे प्रश्न चिन्ह खड़ा करती है , ये ऐसा अहम मुद्दा है जिसे जोर शोर से उठाये जाने पर बीजेपी विचलित हो सकती है.

राजा कभी नही चाहेगा की एक ऐसी व्यवस्था का निर्माण हो जो उसके अनुचित कार्यो की निगरानी रखे . ललित मोदी से लेकर नीरव मोदी के जुर्म कर विदेश भागने की संस्कृति कही ना कही मोदी को ही कठघरे मे खड़ा करती है क्योंकि लोकतंत्र भाषणो से नही चलता और जवाबदेही सबको देनी पड़ती है चाहे वो मंत्री हो या राजा.

मुद्दों से कही दूर हमारे देश के राजा मोदी जी के पास अभी केवल इतना समय अवश्य है की वे सत्ता में आने के चार साल बाद भी कांग्रेस को जी भर के कोसते है इन चार सालो का उपयोग उन्होंने पूरी पृथ्वी का  भ्रमण करने में अवश्य किया है।  उनसे पूछना चाहिए की अभी तक कितना निवेश विदेशो से  भारत में आ चूका है। 
अभी भी पकिस्तान अपनी कारगुजारिओ से बाज क्यों नहीं आता। नीरव मोदी जैसे लोगो की संख्या हमारे देश में क्यों बढ़ती जा रही है। 
गंगा कितनी साफ़ हो गई क्या अब गंगा माँ आप को नहीं बुलाती ,सांसदों के गोद  लिए गांवो का क्या हाल है , कुछ नहीं तो दिल्ली के सातो सांसदों के कार्य ही दिखला दीजिये।
स्मार्ट शहरो के नाम पे जनता को इतना गदगद करने के बाद क्या उनकी सड़क तक का निर्माण हुआ है। काला धन पे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में आपको कमिटी गठित करनी पड़ी। जिस gst का आपने 12  प्रतिशत  की दर से कांग्रेस द्वारा लागु होने पर  इतना विरोध किया उसको  28  प्रतिशत तक की दर से हिंदुस्तान की जनता पर लागू करते थोड़ी भी दया नहीं आई। जिस fdi का आपने इतना विरोध किया उसी को  इस देश के रक्षा मंत्रालय तक में लागु कर दिया।  
खैर आप सेवक नहीं राजा है राजा मोदी। जो आज भी अपने भाषणों से जनता का मन मोहते है और मन की बात करते है पर ये हिन्दुस्तान की आवाम है जो सर आखो  पे बैठाना जानती है तो अर्श से फर्श पे लाना भी। 


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नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी 

kamal haasan and arvind kejriwaal



कमल हासन और अरविन्द केजरीवाल  - 


kamal haasan and arvind kejriwaal
kh and ak  



कमल हसन की अदाकारी का मैं बड़ा फैन रहा हूँ ,उनकी चाची  420 बचपन के दिनों से ही मेरी पसंदीदा फिल्मो में से एक रही है।  उस समय कम  फिल्मे ही होती थी जिनमे बच्चो और बड़ो दोनों को कॉमेडी में मजा आता था।एक इंसान कैसे अपनी शादी को बचाने के लिए औरत का वेश धारण करता था वो भी उम्र दराज औरत का कमल हसन ने उसे बखूबी निभाया था ,फिल्म में छोटा  सा सन्देश जातिगत भेदभाव को लेकर भी था। आपकी जानकारी के लिए बता दूँ  की कमल हसन ने बतौर बाल कलाकार ६ वर्ष की उम्र में फिल्मो में कदम रखा था फिल्म का नाम था कलत्तुर कन्नमा। कमल हसन को कराटे और भरतनाट्यम का बखूबी ज्ञान है। जो की उन्होंने अपनी प्रारम्भिक अवस्था में ही ले लिया था। 
कमल हासन के नाम पदमश्री से लेकर चार बार राष्ट्रिय और अलग - भाषाओं में 19 फिल्मफेयर पुरस्कार मिल चुके है। उन्होंने खुद को पुरस्कारों से दूर रखने की घोषणा भी की थी. फिर भी २०१४ में उन्हें पदमविभूषण से सम्मानित किया गया। कमल हासन हे राम जैसी फिल्मो का निर्देशन भी कर चुके है जो गांधी जी की हत्या पर आधारित था और जिसमे शाहरुख़ खान ने काम किया था। कमल हासन अपनी पारिवारिक जिंदगी की वजह से भी काफी विवादित रहे कारण उनके अन्य अभिनेत्रियों से प्रेम - संबंध और  और कई शादिया रही है।  

हाल के दिनों में कमल हासन अपनी नई  पार्टी  को लेकर फिर चर्चा में है और उससे ज्यादा चर्चा आम आदमी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को अपनी पार्टी के स्थापना के अवसर पे बतौर मुख्य अतिथि बनाकर।  केजरीवाल और आम आदमी पार्टी भी इधर कुछ दिनों से समाचार पत्रों की सुर्खियों में छाई हुई है वजह है आप विधायक अमानतुल्लाह खान और उनके अन्य सहयोगियों द्वारा दिल्ली के  मुख्य सचिव की पिटाई. आम आदमी पार्टी के विधायकों पे मारपीट का ये कोई पहला मामला नहीं है ऐसे मामलो की पूरी फेहरिश्त पड़ी हुई है। केजरीवाल भारतीय सोशल मीडिया में सबसे ज्यादा मजाक का पात्र बनने वाले किरदार बन चुके है ,उनकी खांसी से लेकर हर गतिविधि पर सोशल मीडिया में अनेक चुटकुले और कहानिया मिल जाएंगे. 


ऐसे में कमल हासन ने उन्हें अपनी पार्टी के स्थापना के अवसर पर बुलाकर सोशल मीडिया को एक और मसाला दे दिया है। अरविन्द केजरीवाल ने कमल हासन को क्या सलाह दी होगी  इस पर  अभी से  सोशल मीडिया में अनेक कमेंट उपलब्ध है। 

मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य के हालियां दिनों में रजनीकांत और कमल हासन दक्षिण भारत के दो ऐसे अभिनेता है जिन्होंने अपनी पार्टी बनाई है। आप को बता दूँ की दक्षिण भारत में अभिनेताओं द्वारा पार्टी बनाने का प्रचलन काफी पुराना है इसका कारण है की दक्षिण भारत में फिल्मो के सुपर स्टार का विशेष दर्जा है क्योंकि  उनके फैन उनके कट्टर समर्थक होते है इसीलिए दक्षिण भारत की फिल्मो में किसी न किसी सामाजिक मुद्दे खासतौर पे बिल्डर ,माफिया ,मंत्री ,साहूकार ,ज़मींदार या दुष्ट राजा द्वारा प्रजा का उत्पीड़न दिखाया जाता है और हीरो किसी सुपर मैन जैसा आकर उनसे लड़ता है और उन्हें उनके कष्टों से मुक्ति दिलाता है। हीरो को परोपकारी और समाज का हित करने वाला दर्शाया जाता है।  यही कारण है की जनता सुपर स्टार से अपनापन महसूस करने लगती है और उसकी दीवानगी अपने स्टार के प्रति जूनून में बदल जाती है , इसका उदाहरण दक्षिण भारतीय शादियों में सुपर - स्टार और राजनेताओ के लगने वाले बड़े - बड़े पोस्टर और फिल्म की रिलीज पर उनके पोस्टरों की पूजा करना है. 

परन्तु ऐसा सारे सितारों के साथ नहीं होता , कुछ चुनिंदा ही ऐसे है जिनके समर्थक  पुरे राज्य में होते है यही कारण है की चुनाव के समय राजनीतिक पार्टियां इन्हे अपने पक्ष में करने के लिए  प्रयासरत रहती है। और ये सुपर - स्टार भी इसका भरपूर लाभ लेते है कई स्टार सत्ता का केंद्र बिंदु बनने की लालसा से अपनी नई  पार्टी ही बना लेते है ताकि वे सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पे ही काबिज हो जाये।  सितारों से मुख्यमंत्री बनने का सबसे बड़ा उदहारण जयललिता का था। 


जबकि उत्तर भारत में ऐसा नहीं हो पाता  सितारों के प्रशंसक  चुनाव में उन्हें ही जितवा दे यही बहुत है। कमल हसन ने अरविन्द केजरीवाल को बुलाकर दक्षिण भारतीय जनता को अच्छा सन्देश नहीं दिया है केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी इस समय भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी विवादित पार्टी है , एक विवाद ख़तम नहीं होता की दूसरा शुरू हो जाता है  और केजरीवाल की छवि एक ऐसे अभिनेता की है जिसका झूठ बोलने और यू टर्न  लेने में कोई सानी  नहीं है।  मुझे लगता है की शायद किसी ने कमल हासन को इस बात की ग़लतफ़हमी पैदा कर दी है की अरविन्द केजरीवाल  आज भी युवाओ की पहली पसंद है तो कमल हासन ने शुरूआती दौर में ही अपनी पार्टी की जड़ो पे कुल्हाड़ी चलाने का काम किया है बाकी आने वाले समय में होने वाले चुनाव ही बताएँगे की भारतीय राजनीति में कमल हासन की पार्टी का भविष्य क्या होगा .   


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आम आदमी पार्टी  aam aadmi party

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अगर कहा जाये की कम  समय में किसी पार्टी का सबसे ज्यादा विवादों से नाता रहा हो तो वो है आम आदमी पार्टी।  आम आदमी पार्टी अपनी स्थापना के समय से ही विवादों में रही है।  अन्ना के आंदोलन में अरविन्द केजरीवाल का शामिल होना और उस आंदोलन के माध्यम से जनता को अपनी उपस्थिति का अहसास करना ही अरविन्द केजरीवाल की शुरूआती रणनीति थी जिसमे वे सौ प्रतिशत कामयाब हुए।  उन्होंने आम जनता पे अपनी छाप छोड़ने के लिए आम जनता की वेशभूषा और और रहन - सहन पे विशेष ध्यान दिया ,जिसमे स्टेशन में अखबार बिछा के सोने से लेकर ठण्ड के दिनों में मफलर पहनने तक सब - कुछ शामिल था।  मैंने इतिहास की किताब में पढ़ा था की गांधी जी अपने शुरुआती दिनों में जब भाषण देने जाते तो कोट और पैंट  धारण किया करते थे। एक बार जब उन्होंने एक सभा में वस्त्र के विषय में टिपण्णी की तो उन्हें प्रथम स्वयं के वस्त्रो का ज्ञान हुआ उन्हें लगा की जबतक आम आदमी की वेशभूषा नहीं धारण करते तब तक  आम आदमी उनसे जुड़ाव नहीं महसूस कर सकता उस समय धोती भारत में पुरुषो की प्रमुख परिधान हुआ करती थी परन्तु उसमे भी कई किस्म थे जो की अत्यंत महंगे थे ,चरखा एक प्रसिद्ध वस्त्र  उत्पादक यंत्र था जो की घर - घर में उपलब्ध था। इसलिए गांधी जी ने निश्चय किया की वे खुद के चरखे से बनाया हुआ धोती ही पहनेंगे व वही उनका एक मात्र वस्त्र होगा। क्योंकि भारत जैसे विशाल देश में जहा की अधिकाँश जनता गरीबी में अपना जीवन यापन करती है और जिन्हे तन पे लपेटने हेतु पूर्ण वस्त्र भी उपलब्ध नहीं है वहा वह कैसे पूर्ण वस्त्र पहन सकते है। 

हालांकि अरविन्द केजरीवाल और गांधी जी में दूर दूर तक कोई समानता नहीं है फिर भी आम जनमानस को वस्त्र से जुड़े इस तथ्य को जानना आवश्यक है। और जो लोग गांधी जी को लेकर प्रश्नचिन्ह खड़ा किये रहते है उनसे मैं इतना ही कहना चाहूंगा की एक बार फेसबुक और व्हाट्सअप छोड़ के इतिहास की प्रामाणिक किताबों का अध्ययन करले। 
अन्ना के आंदोलन में अरविन्द केजरीवाल के साथ उनका एन जी ओ - इंडिया अगेंस्ट करप्शन भी सुर्खियों में था इसके नाम ने भी जनता पर सकारात्मक असर डाला मोदी  के उदय की संभावना को इस आंदोलन ने जैसे रोक ही दिया था और इसका सारा श्रेय भुनाने में अरविन्द केजरीवाल सफल हुए।  उन्होंने कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों को एक जैसी बताया उनकी बातों में आम आदमी की झलक मिली और उन्होंने इसी नाम से पार्टी की स्थापना की घोषणा कर दी। 

हालांकि अन्ना ने उनकी मंशा पे शंका जाहिर की परन्तु फिर भी वे अन्ना को विश्वास में लेने में कामयाब हुए।  उन्होंने अपनी पार्टी और उसके प्रतिनिधियों के विषय में राजनीति से इतर बातें की और आम आदमी से दिखने वाले चेहरे को उम्मीदवार बनाया और खुद भी खड़े हुए चुनावों में पूर्ण बहुमत तो नहीं मिला पर पार्टी ने उम्मीद से ज्यादा सीट हासिल की दिल्ली का चुनाव होने के कारण सन्देश देश के कोने - कोने में गया।
बीजेपी  के हाथ से लोकसभा चुनाव खिसकते हुए दिखाई दिया। परन्तु कहते है सत्ता  अच्छे - अच्छो का मतिभ्रम कर देती है। और अरविन्द केजरीवाल  ने कांग्रेस से समर्थन लेकर जनता को आप की नीयत और अरविन्द केजरीवाल की कथनी और करनी के विषय में सोचने पे मजबूर किया क्योंकि कांग्रेस के समर्थन का प्रश्न पूछे जाने पर अरविन्द केजरीवाल ने अपने बच्चो तक की कसमे  खा ली थी।  लोकसभा चुनाव में हुई हार से जल्द ही उन्हें इस बात की समझ आ गई और उन्होंने 45 दिनों में अनिल कपूर के नायक फिल्म की तरह एक बार फिर अपनी छाप जनता पर छोड़ी और 45 दिन बाद कांग्रेस को भी छोड़ दिया।  उनके कामो से दिल्ली  के निचले तबके के लोगो ने पुलिस और प्रशासन के उत्पीड़न से राहत महसूस किया और अगली बार उनको एक बार फिर दिल्ली का ताज सौंप दिया। 

परन्तु सत्ता और लालच   के खेल में अरविन्द केजरीवाल के विधायक से लेकर मंत्री तक  लगातार विवादों में बने हुए है। दूसरो पे आरोप लगाने वाली पार्टी  पे इस समय एक के बाद एक इतने आरोप है की पिछ्ला आरोप छोटा पड़ जाये और यदि यहां उन आरोपों का जिक्र किया जाए तो शायद कई पृष्ठ लग जाए। फिलहाल ताजा आरोपों में २० विधायकों का निलंबन और इन सीटों पर होने वाले चुनाव ही आप पार्टी का राजनीतिक भविष्य तय करेंगी की पार्टी पर जनता का विश्वास कितना बना हुआ है।  

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mudaa and life


      मुद्दा और ज़िन्दगी 


                           
mudda
रायजी 


  • Kya hua fir raat ho gai Bina kisi baat ki.mudde wo nahi rahte jinse Zindagi aasan hoti hai.mudde wo rahte Hai jinke hone se Zindagi aasan ho jayegi.jo kabhi pure nahi hote.

  • mudde he to Hai hamari Zindagi me Baki Zindagi kaha bachti hai ab.paida hue tab se mudde suru ho jate Hai marne ke baad bhi mudde peechha nahi chhodte ab Mahatma Gandhi se leker Nehru tak ko dekh lijiye.bechare Mahatma Gandhi ki murder ki file dubara khul rahi Hai.nehru ke decision ko galat sahi bataya ja Raha Hai per apne kuch nahi Kiya ja Raha Hai.koi pappu ban baitha to koi fenku per enke siwa koi gental man bhi to nahi dikhai deta maidan me.kaam to enhi se chalana padta Hai bechari Bharat MAA ko.aakhir koi n koi mudda to chahiye jeene ke liye.aur.......



  • .हम भारत के लोग

gorakhpur to lucknow

gorakhpur to lucknow
गोरखपुर से लखनऊ 

गोरखपुर से लखनऊ  - gorakhpur to lucknow


स्टेशन  पे गाड़ी की सीटी के साथ ही मेरी ट्रेन भी   धीरे - धीरे रफ़्तार पकड़ने लगी। घर से बाहर ये मेरा पहला कदम था कारण लखनऊ में मेरा एडमिशन एक इंजीनियरिंग कॉलेज में हुआ था और कल उसकी रिपोर्टिंग है। घर पे अकेले होने और पिता जी की तबियत ख़राब होने के कारण गोरखपुर से लखनऊ तक का सफर मुझे अकेले ही तय करना पड़ा। पारिवारिक स्थिति ठीक न होने के कारण सबकी उम्मीदे मुझी से थी। फिलहाल ट्रेन के जनरल कम्पार्टमेंट में सवार मैं खड़ा - खड़ा ही अपने भविष्य  के सपने बुनने में व्यस्त था तभी पीछे से किसी  की आवाज आई पीछे मुड़के देखा तो एक लड़की आगे बढ़ने का रास्ता मांग  रही थी। 

काली आँखे ,गुलाबी गोरापन और सुंदर मुखड़े को मैं अनायास ही   ध्यान से देखने लगा उसके चेहरे की सादगी देख के अचानक मुझे लगा की जैसे ज़िन्दगी कुछ कह रही है और मैं ध्यान से सुन रहा हूँ मैं उसको रास्ता देते हुए  किनारे   हो  गया।  अब तो गोरखपुर से लखनऊ का सफर सुहाना सा लगने लगा था। दिल में एक अलग ही उमंग थी कई तरह के सपने भी देखने चालू हो गए। थोड़ी देर बाद वो लड़की वापस आई और बगल से होते हुए मेरे पीछे वाली सीट पे ही बैठ गई ,शायद मैंने पहले पीछे मुड़  के देखा ही नहीं था नहीं तो पहले ही  उसे देख लेता खैर अभी ट्रेन की रवानगी हुए कुछ ही समय हुआ था।  फिर तो मैंने भी अपनी दिशा बदल ली और अपनी नजरे उसकी ओर कर ली , कई बार हमारी नजरे आपस में टकराई पर उन नजरो में नजाकत और शराफत दोनों ही भरी हुई थी और लग रहा था साथ में कुछ अलग एहसास की शुरुआत भी हो रही थी शायद यही पहली नजर का  प्यार है।

 बस्ती  स्टेशन पे कुछ सवारियों के उतरने से मुझे उसके सामने वाली ही सीट मिल गई  मुझे लगा जैसे ईश्वर ने मेरी मुराद ही पूरी कर दी अब वो मेरी नजरो के ठीक सामने ही थी। इशारो ही इशारो में मुझे पता चला की वो भी अपनी मौसी के साथ लखनऊ ही जा रही थी और लखनऊ  में अपनी मौसी के साथ रहकर यूनिवर्सिटी से बी काम प्रथम वर्ष की छात्रा थी। 

उसकी मौसी बहुत ही कड़क मिजाज की थी इसलिए वार्तालाप का माध्यम इशारा ही  था। लखनऊ आते आते हमने एक दुसरे का पता ले लिया था जिससे की हम मिल सके ,लखनऊ स्टेशन पहुंचने पे ऐसा लगा जैसे पूरा सफर सिर्फ चंद लम्हो ही का था ,स्टेशन पे विदा होते समय एक अजीब मायूसी थी, लग रहा था मानो कोई हमसे हमारा सब - कुछ लेके जा रहा है उसकी आँखों में भी एक अजीब सी नमी थी। इत्मीनान बस इतना ही था की अगली मुलाक़ात  की गुंजाइश बची हुई थी। और इन्ही अगली मुलाकातों ने उसे ज़िन्दगी भर के लिए मेरा हमसफ़र बना दिया। आज भी हम वो पहली मुलाक़ात और गोरखपुर से लखनऊ का सफर याद करके रोमांचित हो उठते है। 

आरम्भ - मैं और वो 
  

after valentine

किस्सा वैलेंटाइन डे के बाद का -  




हाँ तो आप लोगो को  वैलेंटाइन दिन वाले दिन तो हमारी और कमला की कहानी पता चली  थी , पर उसके बाद क्या हुआ इसको बताने में इतनी देर इस  वजह से हुई की भैया  अस्पताल से ठीक होने में थोड़ा टाइम लग गया। 

अब आप ये सोच रहे है  की हमारी कुटाई हो गई थी  तो बिलकुल सही सोच रहे है।  दरअसल वैलेंटाइन डे वाले दिन कमला को  देखते ही हमरे प्यार का थर्मामीटर इतना हाइ हो गया था की कमला को  सीट पे बैठाने  के बाद हमारी साइकिल की स्पीड 60 किलोमीटर / घंटा हो गई थी , और हम कुछ ही देर में शहर के गुरमुटिआ पार्क आ पहुंचे। पार्क लैला - मजनुओं से खचाखच  भरा हुआ था ,तरह - तरह के दिल के आकर वाले गुब्बारे हाथ में लेके लइका - लईकी  घूम रहे थे , हम तो सीधे कलेजा हथेली पे रखके आये थे अब  इतना तगड़ा बंदोबस्त होने के बाद इस तरह के पार्क में आना कलेजा हाथ में रखके आना ही तो  हुआ। हां तो पार्क में तरह - तरह के नमूने भी देखने को मिले कई ठो  ऐसे मिले की विश्वास हो गया की प्यार अँधा होता है अब हो काहे न एक खूबे सुन्दर लईकी बानर जइसे लइका के हाथ में हाथ डाले घूम रही थी देखे तो लइका का किनारे का बाल पूरा सफाचट था सिर्फ बीच में कुछ बचा था वो भी खड़ा। मेकअप तो इतना पोत के घूम रहीं  थी लोग की अगर भगवान् बरस जाते तो  हरी - हर घांस सफ़ेद हो जाती और चेहरा यूपी के सड़क जैसा। 

मुंह से जानू  - सोना  करके चाशनी इतना झर  रहा था की लगा की आज  के बाद प्यार  करने को ही नहीं मिलेगा। खैर हमको दुसरे से क्या करना था हमको लगा इहा ज्यादा देर रहना सुरक्षित नहीं इसलिए हम अपनी बुद्धि पे भरोसा करके उहा  से खिसक लिए और पहुँच गए गोलगप्पा खाने वहाँ पे भी उहे हाल जल्दी - जल्दी गोलगप्पा खाने के बाद  निरहुआ का एक ठो सिनेमा देखे चल दिए टिकट हम पहले ही खरीद लिए थे वो भी किनारे वाला। आज के दिन का पूरा प्लानिंग हम पहले ही कर लिए थे हाँ सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए  एक ठो  बुरका भी साथ लाये थे। फिलम शुरू होते ही हाल में सीटी और ताली का  आवाज शुरू हो गया  हम भी निश्चिंत होक कमला से बतियाने  लगे। लगा की आज पूरा   मेहनत स्वार्थ हो गया।


 तभी पता नहीं कहा से जोर - जोर से आवाज आने लगी देखे तो हमारी सिट्टी - पिट्टी  गुम , हाल पे बजरंग दल वाले पूरी बटालियन लेके आ गए थे उधर परदे पे निरहुआ का एक्शन सीन शुरू हुआ और  इहा हकीकत में ,बुर्का पहिनने का मौका भी नहीं मिला। सीन जबतक ख़तम हुआ तब - तक हमरा पुर्जा - पुर्जा हिल चुका था और मुंह से बस इहे  निकला  -  हे राम ...... 


मजेदार पढ़े    -  #वैलेंटाइन दिवस के पटाखे

 

main aur wo


main aur wo
मैं और वो 



हमारे वास्तविक जीवन में कई घटनाये ऐसी होती है जो अपनी छाप हमारे जीवन में छोड़ जाती है और कुछ ऐसी होती है जो हमारी दिशा ही बदल देती है। अक्सर इस बदलाव का कारण कोई और होता है और जब बदलाव का कारण कोई  लड़की  होती है तो  उसे हम वो से सम्बोधित करते है।  


main aur wo
main aur wo

इन्ही सारी  कश्मकश के बीच कुछ रूहानी यादें रह जाती है और कहानी शुरू होती है , इन कहानियो  में अक्सर ही दो पात्र प्रमुख होते है एक मैं और एक वो यानी " मैं और वो "


जल्द ही इस ब्लॉग पे  " मैं और वो " नामक एक नई कहानी सीरीज शुरू होने जा रही है । आप भी अपनी रचनाये मैं और वो सीरीज में भेज सकते है।  सोमवार को इस सीरीज की पहली कहानी प्रकाशित होगी. उम्मीद है आप सब को अवश्य पसंद आएगी अपनी प्रतिक्रियाएं इस सीरीज और ब्लॉग के प्रति अवश्य दे।  आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है।                                             


                                                                                                             रायजी 


मजेदार  -  

#वैलेंटाइन दिवस के पटाखे 


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modi vs modi

# नरेन्द्र मोदी बनाम ब्रांड मोदी - 2019 


कुछ भी कह दो पर पर बंदे मे है दम , जी हाँ  हम बात कर रहे है अपने वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी जी की वैसे तो मैं ना किसी दल का पक्ष लेता हू ना ही किसी भी दल के प्रति मेरी विशेष निष्ठा है , मैने कई मोर्चो पे मोदी जी से लेकर राहुल गाँधी तक सबकी आलोचना भी की है , पर आलोचना का मूल उद्देश्य किसी के प्रति दुराग्रह नही होता एक अच्छा आलोचक ही एक अच्छा हिमायती भी होता है .

rally pic
 चित्र साभार इंडियन एक्सप्रेस 

और लेखक को चाहिये की उसकी लेखनी मे किसी प्रकार का दुराग्रह और और अंधभक्ति ना हो , ये बात अलग है की किसी विषय मे जनता का क्या मत होता है और हमारे देश मे जहा अलग अलग विचार धारा के लोग है उनका किसी भी विषय मे अलग अलग मत हो सकता है . किसी को कुछ पसंद होता है और किसी को कुछ , आते है अब अपनी बात पे समाचर चैनलो पे देख रहा था की मोदी ओमान मे भारतीय समुदाय को संबोधित कर रहे थे उनका भव्य स्वागत और भारतीयो के बीच का उत्साह बताता है की बंदे मे कितना दम है . लाख आलोचनाओ के बाद भी अभी से 2019 मे मोदी की जीत पक्की है शंका केवल वही कर सकते है जिन्होने सच्चाई से मुंह मोड रखा है .

कारण मोदी के सापेक्ष मौजूदा परिदृश्य मे कोई ऐसा नेता नही दिखाई देता जिसपे जनता विश्वास कर सके भले ही लोग कहे की मोदी की लोकप्रियता कम हुई है फिर भी कुछ सीटे कम हो सकती है लेकिन 2019 मे भी मोदी सरकार ही रहेगी कारण सरकार की छवि पे एक भी दाग का ना होना , जिसमे संप्रग सरकार ने रिकॉर्ड तोड दिया था .

अन्य कारणो मे विदेशो मे भारत की बढ़ती धमक , हिन्दूवादी एजेंडा , कमजोर विपक्ष , और सरकार की निर्णय क्षमता ऐसे मुद्दे है जिनका लाभ मोदी सरकार को मिलेगा हालांकि बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे पे सरकार को नुकसान हो सकता है . मोदी सरकार के कुछ मंत्रियो और नेताओ का बड़बोलापन भी सरकार के हित मे नही है .पिच्छ्लि बार की तरह वोटो का ध्रुवीकरण कितना होगा और इसका लाभ किसे मिलेगा ए अभी कुछ कहा नही जा सकता . पर इन सबके बाद जो सबसे बड़ा मुद्दा है वो है मोदी .

इस बार के चुनाव मे विपक्ष मे कोई और नही मोदी खुद है , मोदी का मुकाबला कमजोर विपक्ष से ना होकर ब्रांड मोदी से है आज भी मोदी हारे हुए गुजरात को जीतकर भाजपा की झोली मे दे देते है उत्तर प्रदेश मे जहा राजनीतिक विश्लेक्षण धरे के धरे रह जाते है और और मोदी पे विश्वास करके जनता भाजपा की झोली मे उत्तर प्रदेश भी डाल देती है ए मोदी नही ब्रांड मोदी है. आने वाले चुनाव भी इसी ब्रांड को प्रचारित करके लड़े जाएं इससे इंकार नही किया जा सकता कर्नाटका , मध्यप्रदेश और राजस्थान ऐसे राज्य है जहा ब्रांड मोदी की एक बार फिर परीक्षा है . अभी लोकसभा चुनावो मे एक साल का समय और है .हो सकता है तबतक फिर हर घर मे ब्रांड मोदी देखने को मिले और हमे फिर से सुनाई दे।
             ” हर हर मोदी घर घर मोदी “

narendra modi vs rahul gandhi

नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी  narendra modi aur rahul gandhi 



                       
narendra modi vs rahul gandhi

modi vs gandhi








ऐसा कौन सा नेता होता होगा जो अपने देश की मीडिया की तुलना मे अमेरिका की मीडिया मे ज्यादा सहज होता है वहा भी उसे अपनी छवि बदलने के लिये काफी मेहनत करनी पड़ी . कभी उसे अपनी ही सरकार के बिल जनता के सामने फाड़ने पड़े बाद मे पता चला की वो बिल ना होकर अपनी ही पार्टी का पर्चा था . कभी संसद मे खर्राटे लेना तो कभी अपनी ही पार्टी को बिना बताये गायब हो जाना . अब तक तो आप समझ गये होंगे की सारी भूमिका इस देश के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रतीक संसद मे विपक्ष के नेता और सबसे पुराने दल कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष राहुल गाँधी जी के बारे मे .

 राहुल गाँधी के विषय मे समझ मे नही आता ऐसी क्या मजबूरी है की पूरी कांग्रेस छानने के बाद अध्यक्ष की कुर्सी के लिये उनसे बेहतर उम्मीदवार नही मिला , जवाब सबको पता है राहुल गाँधी उसी वृक्ष की शाखा है जो प्रारंभ से ही इस देश पर राज करता आया है . वर्ना आजकल तो काबिलियत ना हो तो आप किसी निजी कम्पनी मे क्लर्क की नौकरी भी नही पा सकते प्रधानमंत्री बनना तो मुँगेरीलाल के सपने देखना है .




अब यदि आपको प्रधानमंत्री बनना है तो आप उम्मीदवार तो हो सकते है पर काबिलियत तो दिखानी ही होगी और आप की वजह से जहा दूसरे अनुभवी और काबिल नेता उम्मीदवार नही बन पाते इसका भरपूर लाभ विपक्ष को मिलता है जो उसे अत्यधिक मजबूत बनाता है . और जनता को उपलब्ध विकल्पो से ही काम चलाना पड़ता है . 
भाजपा के बाद कॉंग्रेस ही वर्तमान समय मे सर्वमान्य राष्‍ट्रीय पार्टी है जिसका अस्तित्व देश के प्रत्येक राज्य मे है पर एक मजबूत नेता के अभाव मे और परिवार के प्रति अन्य नेताओ की श्रद्धा इस पार्टी को दीमक की तरह खाती जा रही है समय है परिवारवाद से उपर उठ के सोचने का . एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिये मजबूत विपक्ष का होना आवश्यक है वर्ना सत्ता के निरंकुश होने का भय बना रहता है . संप्रग-2 के शासन काल मे हुए घोटालो को जनता आज भी नही भूल पायी है रिमोट से सरकार को नियंत्रित करना किसी भी स्वस्थ समाज की जनता बर्दाश्त नही कर पाती है वैसा ही यहा भी हुआ और जनता ने एक पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने मे जोर - शोर से भागीदारी की और उसे मोदी की बातो मे एक ऐसे नेता की छवि दिखाई दी जो की जनता के तमाम दुखो को दूर कर अच्छे - दिन दिखला सकता है.

 लेकिन चार साल बीत जाने के बाद क्या विपक्ष मे इस बात का माद्दा है की वो जनता को समझा सके की वर्तमान सरकार ऐसा क्या कर रही है जिससे देश का खजाना खाली हो रहा है या खजाना भरने के चक्कर मे आम आदमी महंगाई और करो के बोझ से दबता चला जा रहा है, सरकार कितने वादो पर खरी उतरी है, शायद कमजोर विपक्ष को सरकार अपनी उंगलियों पे नचा रही है और विपक्ष के पास मुद्दे होकर भी नही है .  


valentine day

#वैलेंटाइन दिवस के पटाखे  ( crackers of valentine day)


एक महीने से जिसका इन्तजार किये रहे और एक हफ्ते से जिसका  रोज छोटी दीपावली की तरह कोई न कोई डे रहता था ऊ  वेलेंटाइन डे आज आ ही गया।बेरोजगारी में   कसम से पैसा बचावे खातिर खैनी तक खाया छोड़ दिए रहे कितना बार त भन्सारी के दूकान के सामने से निकले पर खैनी की तरफ देखे भी नहीं। बस कमला का गेंदा की फूल की तरह खिला चेहरा देख के मन हरिहरा  जाता था। आजे  अपनी साइकिल में आगे एगो छोटका सीट लगवाए हैं  एही पे बैठाके  कमला को नहरी से लेके शहर वाला पारक में घुमाएंगे सुने है उहा तो मेला लगता है गुब्बारा से लेके चाट - गोलगप्पा सब मिलता है।  हमरी कमला को भी गोलगप्पा बहुत पसंद है उहो तीखा। 


काल्हिए साइकिल से शहर जाके कमला के लिए बढ़िया सा गिफ्ट लाये है अब बताएँगे नहीं की हम का लाये है 
इ बस हमरे और कमला के बीच की  बात है। हाँ पर  गिफ्ट के साथ चेंगु हलवाई की इमरती जरूर लाये है चेंगा की दूकान पे आज के दिन गजबे  का भीड़ था , हो काहे  नहीं उ से अच्छा मिठाई पूरा इलाका में कौन बनावत  है।  धक्का मुक्की में जरूर एक थो दांत निकल गया हमारा पर वो भी हमारी कमला से बढ़ के थोड़ी न था।  


पता नहीं काहे आज सुबह से इ फोनवे नहीं मिल रहा है और इ वैलेंटाइन डे का मुहूरत भी निकला जा रहा है। सोच रहे है एक बार साडी पहन के कमला के घरवे चले जाये कह देंगे अंकल आज शिवरात्रि पे मंदिर जाना है जल चढाने। पर इ मूंछ का का करेंगे कमला कही थी इ मूंछ ही त हमारी शान है और हमारे करिया चेहरे में एक मूंछ ही तो उसको पसंद है।  न .. थोड़ा देर और इन्तजार कर लेते है प्यार में इन्तजार का अलगे मजा है। 

valentine day rose
valentine day rose


हां पर आज बड़ा सावधानियों बरतना पड़ेगा पिछली बार तो खाली बजरंग दाल वाले ही हाथ में दू - दू  गो डंडा लेके घूम रहे थे इस बार तो जोगी एंटी रोमिओ वालो को ही लगा दिए है।  हमको लगता है की इन लोगो को तो कौनो लड़की पूछी नहीं , अब पूछती कईसे कंठी माला देख के तो इहे लगेगा की इ लोग साधू है  और शादियों के बाद मोदी जी जैसे संन्यास ले लिए तो हमरा  का होगा। एक थो महात्मा बड़ा ठीके कहे है " पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया  न कोई ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होई " . 

लगता है कमला आ रही है अब हम चलते है क्योंकि हम नहीं चाहते की उ  इन्तजार करे जिससे प्यार किये है उसको कौनो तकलीफ हो तो कसम से कलेजा से रोआई छूटता है। और हां अपना भी ध्यान रखियेगा और हॉलमेट साथे लेके चलिएगा क्योंकि कौनो दल और कौनो सेना अरे भारतीय सेना नहीं करणी सेना टाइप 
आज के दिन हमरा और आपके ऊपर पटाखा फोड़ सकती है और हाँ  



              HAPPY VALENTINE DAY 

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population

भारत की जनसँख्या (population of India)






 स्टेशन पे खचाखच भरी रेल गाड़ी आते ही धक्का – मुक्की , गाली गलौच और झगड़े का दौर शुरु हो जाता है , दरवाजे तक लटके लोग और उसी डिब्बे मे चढ़ने के लिये लगी कतार , अंदर सांस लेने की जगह नही एक दूसरे के उपर चढ़े लोग . ये आम नजारा आपमे से अधिकांश लोगो ने देखा होगा महसूस इसलिये नही किया होगा की भई हमारे पास तो पैसा है .पहले से ही वातानुकूलित या शयनयान श्रेणी मे सीट आरक्षित करा रखी है . पर क्या चार दिन बाद या महीने बाद का आरक्षण भी आपको आसानी से मिल जाता है. 

crowd in india
bheed 

अब सडको को ही ले लीजिये हर साल लगभग 5 लाख दुर्घटनाए होती है और लगभग 1.5 लाख लोग अपनी जान से हाथ धो बैठते है . मैं खुद घर से बाहर निकलने पर भगवान से अपनी सलामती की दुआ मांगकर निकलता हूँ , क्योंकि हम अपनी गलती तो छोड़ दीजिये दूसरो की गलती का ज्यादा शिकार होते है . कल जिस सिंगल रोड पे आराम  से यात्रा हो जाती थी आज फोरलेन होने के बाद भी गाडियाँ जाम मे अपना समय और संसाधन दोनो बर्बाद कर रही है . देश की क्रियाशील जनसंख्या का अधिकांश समय जाम मे ही निकल जाता है . 

हर साल बढ़ती बेरोजगारो की फ़ौज , कृषि योग्य भूमि मे होती कमी , कंक्रीट के छतो की बढ़ती मांग , प्राकृतिक संसाधनो का तेजी से दोहन , मांग और पूर्ति मे बढ़ता अंतर , अधिकांश क्षेत्रो मे जल का अकाल क्या ये जनसंख्या विस्फोट का संकेत है या शायद होना शुरु हो चुका है .

एक घर मे यदि सद्स्यो की संख्या बढ़ने लगती है तो उसमे नये कक्ष का निर्माण या दूसरे जगह नया घर ही बना लिया जाता है . पर हम इस नयर धरा का निर्माण कहा से करेंगे . बांग्लादेश जनसंख्या विस्फोट का प्रमुख उदाहरण है रोहिन्ग्या शरणार्थी इसी का परिणाम थे . बांग्लादेश मे सडको पे पैदल चलने वालो की इतनी भीड़ रहती है की उनके लिये रेड और ग्रीन सिग्नल बने है . अभी तो संचार क्रांति ने कई जगहो पर लगने वाली कतार को कम कर दिया नही तो ज़िंदगी का 1/3 हिस्सा लाइनो मे ही निकल जाता .दिल्ली जैसे महानगरो मे तो सांस लेना भी दुश्वार हो गया है.

यही हाल रहा तो पूरे देश मे दिल्ली जैसी भयावह स्थिति होगी.बढ़ती जनसँख्या से हम अपने देश में प्रति व्यक्ति भोजन की गुणवत्ता को नहीं दे पाते जिस कारण  व्यक्ति के काम करने की क्षमता में कमी आती है। हमारे देश के संसाधन सीमित है तथा जनसँख्या बढ़ने पर उनपर दबाव पड़ना लाजिमी है ,उपलब्ध जनसँख्या भी रोजगार से लेकर संसाधनों को जुटाने तक तनाव ग्रस्त रहती है। एक तरफ जहा राजनीतिक पार्टियों द्वारा स्वयं की  स्वार्थ सिद्धि  और अपने - अपने वोट बैंक बढ़ाने हेतु इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है वही आने वाले चंद  सालो में ही इसके भीषण परिणाम देखने को मिलेंगे। 

फिलहाल मौजूदा महंगाई को देखते हुए एक बच्चे का भरण पोषण बेहतर तरीके से हो जाये वर्तमान समय में यही बेहतर है , सरकार करे चाहे न करे लेकिन आम आदमी अपनी समस्या को देखते हुए और होने वाले बच्चे के उज्जवल भविष्य हेतु वही कार्य करेगा जो उसके हित  में है। 

"क्योंकि छोटा परिवार सुखी परिवार "

इन्हे भी पढ़े - बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ 
             

spirituality part2

Adhyatmikta -  jeewan ki aawashyakta   

आध्यात्मिकता -  जीवन की आवश्यकता 

भगवान् श्रीकृष्ण ने गीता में सर्वप्रथम आध्यात्मिकता के विषय में विस्तार से चर्चा की थी  . वर्तमान जीवन की भागदौड़ , रिश्तो की आपाधापी  और जीवन की अस्थिरता मानसिक विचलन का प्रमुख कारण है। आध्यात्मिकता एक ऐसा माध्यम है जिससे इन सारी  समस्याओ का निवारण हो सकता है।  अगर हम अध्यात्म में कच्चे है तो अनेक ऐसे श्रेष्ठ गुरु है जिनकी शरण में और मार्गदर्शन लेकर हम इस पथ पर आगे बढ़ सकते है। 



adhyatmikta
adhyatmikta 


क्या है आध्यात्मिकता (what is spirituality) -  

आध्यात्मिकता ज्ञान की वह शाखा है  जो संसार की वास्तविकता से हमारा साक्षात्कार कराती है और ईश्वर और हमारे बीच समबन्ध स्थापित करती है। आध्यात्मिकता को किसी धर्म विशेष से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है।  अध्यात्म में समूर्ण सृष्टि का  संचालन कर्ता एक ही सर्वशक्ति को माना  गया है. अध्यात्म का प्रारम्भ मन की चेतना से  होता है. जिसमे सर्वप्रथम मन के विकारो को दूर करना और सांसारिक या भौतिक निश्चेतना से  परलौकिक चेतना   की ओर बढ़ना है। 

आध्यात्मिकता और मनोविज्ञान (spirituality and psychology) - 

आधुनिक वैज्ञानिको ने आध्यात्मिकता को मनोविज्ञान से जोड़कर देखा है उनका मानना है की अध्यात्म एक सकारात्मक मनोविज्ञान है जो मनुष्य को निराशा के छड़ो से निकालकर आशा को ओर ले जाता है , जीवन के कठिन छड़ो  में उसका विश्वास ईश्वर और उसके न्याय व्यवस्था पे बनाये रखता है जिससे वह कठिन छड़ो में  भी सकारात्मकता के साथ  खड़ा रहता है। उसे संसार का  भौतिक ज्ञान हो जाता है। अगर मनुष्य के कठिन क्षड़ों  में पूरा संसार उसके विपरीत खड़ा हो या उसका साथ छोड के चला जाये तो यही विश्वास उसकी ताकत बनता है. 

अध्यात्म हमें भौतिक ज्ञान से आत्मीय ज्ञान का अनुभव कराता  है जिसमे हम अपनी आत्मा से भली भांति परिचित होते है। 
शेष अगले अंश में। ....  

   

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