kamal haasan and arvind kejriwaal



कमल हासन और अरविन्द केजरीवाल  - 


kamal haasan and arvind kejriwaal
kh and ak  



कमल हसन की अदाकारी का मैं बड़ा फैन रहा हूँ ,उनकी चाची  420 बचपन के दिनों से ही मेरी पसंदीदा फिल्मो में से एक रही है।  उस समय कम  फिल्मे ही होती थी जिनमे बच्चो और बड़ो दोनों को कॉमेडी में मजा आता था।एक इंसान कैसे अपनी शादी को बचाने के लिए औरत का वेश धारण करता था वो भी उम्र दराज औरत का कमल हसन ने उसे बखूबी निभाया था ,फिल्म में छोटा  सा सन्देश जातिगत भेदभाव को लेकर भी था। आपकी जानकारी के लिए बता दूँ  की कमल हसन ने बतौर बाल कलाकार ६ वर्ष की उम्र में फिल्मो में कदम रखा था फिल्म का नाम था कलत्तुर कन्नमा। कमल हसन को कराटे और भरतनाट्यम का बखूबी ज्ञान है। जो की उन्होंने अपनी प्रारम्भिक अवस्था में ही ले लिया था। 
कमल हासन के नाम पदमश्री से लेकर चार बार राष्ट्रिय और अलग - भाषाओं में 19 फिल्मफेयर पुरस्कार मिल चुके है। उन्होंने खुद को पुरस्कारों से दूर रखने की घोषणा भी की थी. फिर भी २०१४ में उन्हें पदमविभूषण से सम्मानित किया गया। कमल हासन हे राम जैसी फिल्मो का निर्देशन भी कर चुके है जो गांधी जी की हत्या पर आधारित था और जिसमे शाहरुख़ खान ने काम किया था। कमल हासन अपनी पारिवारिक जिंदगी की वजह से भी काफी विवादित रहे कारण उनके अन्य अभिनेत्रियों से प्रेम - संबंध और  और कई शादिया रही है।  

हाल के दिनों में कमल हासन अपनी नई  पार्टी  को लेकर फिर चर्चा में है और उससे ज्यादा चर्चा आम आदमी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को अपनी पार्टी के स्थापना के अवसर पे बतौर मुख्य अतिथि बनाकर।  केजरीवाल और आम आदमी पार्टी भी इधर कुछ दिनों से समाचार पत्रों की सुर्खियों में छाई हुई है वजह है आप विधायक अमानतुल्लाह खान और उनके अन्य सहयोगियों द्वारा दिल्ली के  मुख्य सचिव की पिटाई. आम आदमी पार्टी के विधायकों पे मारपीट का ये कोई पहला मामला नहीं है ऐसे मामलो की पूरी फेहरिश्त पड़ी हुई है। केजरीवाल भारतीय सोशल मीडिया में सबसे ज्यादा मजाक का पात्र बनने वाले किरदार बन चुके है ,उनकी खांसी से लेकर हर गतिविधि पर सोशल मीडिया में अनेक चुटकुले और कहानिया मिल जाएंगे. 


ऐसे में कमल हासन ने उन्हें अपनी पार्टी के स्थापना के अवसर पर बुलाकर सोशल मीडिया को एक और मसाला दे दिया है। अरविन्द केजरीवाल ने कमल हासन को क्या सलाह दी होगी  इस पर  अभी से  सोशल मीडिया में अनेक कमेंट उपलब्ध है। 

मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य के हालियां दिनों में रजनीकांत और कमल हासन दक्षिण भारत के दो ऐसे अभिनेता है जिन्होंने अपनी पार्टी बनाई है। आप को बता दूँ की दक्षिण भारत में अभिनेताओं द्वारा पार्टी बनाने का प्रचलन काफी पुराना है इसका कारण है की दक्षिण भारत में फिल्मो के सुपर स्टार का विशेष दर्जा है क्योंकि  उनके फैन उनके कट्टर समर्थक होते है इसीलिए दक्षिण भारत की फिल्मो में किसी न किसी सामाजिक मुद्दे खासतौर पे बिल्डर ,माफिया ,मंत्री ,साहूकार ,ज़मींदार या दुष्ट राजा द्वारा प्रजा का उत्पीड़न दिखाया जाता है और हीरो किसी सुपर मैन जैसा आकर उनसे लड़ता है और उन्हें उनके कष्टों से मुक्ति दिलाता है। हीरो को परोपकारी और समाज का हित करने वाला दर्शाया जाता है।  यही कारण है की जनता सुपर स्टार से अपनापन महसूस करने लगती है और उसकी दीवानगी अपने स्टार के प्रति जूनून में बदल जाती है , इसका उदाहरण दक्षिण भारतीय शादियों में सुपर - स्टार और राजनेताओ के लगने वाले बड़े - बड़े पोस्टर और फिल्म की रिलीज पर उनके पोस्टरों की पूजा करना है. 

परन्तु ऐसा सारे सितारों के साथ नहीं होता , कुछ चुनिंदा ही ऐसे है जिनके समर्थक  पुरे राज्य में होते है यही कारण है की चुनाव के समय राजनीतिक पार्टियां इन्हे अपने पक्ष में करने के लिए  प्रयासरत रहती है। और ये सुपर - स्टार भी इसका भरपूर लाभ लेते है कई स्टार सत्ता का केंद्र बिंदु बनने की लालसा से अपनी नई  पार्टी ही बना लेते है ताकि वे सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पे ही काबिज हो जाये।  सितारों से मुख्यमंत्री बनने का सबसे बड़ा उदहारण जयललिता का था। 


जबकि उत्तर भारत में ऐसा नहीं हो पाता  सितारों के प्रशंसक  चुनाव में उन्हें ही जितवा दे यही बहुत है। कमल हसन ने अरविन्द केजरीवाल को बुलाकर दक्षिण भारतीय जनता को अच्छा सन्देश नहीं दिया है केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी इस समय भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी विवादित पार्टी है , एक विवाद ख़तम नहीं होता की दूसरा शुरू हो जाता है  और केजरीवाल की छवि एक ऐसे अभिनेता की है जिसका झूठ बोलने और यू टर्न  लेने में कोई सानी  नहीं है।  मुझे लगता है की शायद किसी ने कमल हासन को इस बात की ग़लतफ़हमी पैदा कर दी है की अरविन्द केजरीवाल  आज भी युवाओ की पहली पसंद है तो कमल हासन ने शुरूआती दौर में ही अपनी पार्टी की जड़ो पे कुल्हाड़ी चलाने का काम किया है बाकी आने वाले समय में होने वाले चुनाव ही बताएँगे की भारतीय राजनीति में कमल हासन की पार्टी का भविष्य क्या होगा .   


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आम आदमी पार्टी

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अगर कहा जाये की कम  समय में किसी पार्टी का सबसे ज्यादा विवादों से नाता रहा हो तो वो है आम आदमी पार्टी।  आम आदमी पार्टी अपनी स्थापना के समय से ही विवादों में रही है।  अन्ना के आंदोलन में अरविन्द केजरीवाल का शामिल होना और उस आंदोलन के माध्यम से जनता को अपनी उपस्थिति का अहसास करना ही अरविन्द केजरीवाल की शुरूआती रणनीति थी जिसमे वे सौ प्रतिशत कामयाब हुए।  उन्होंने आम जनता पे अपनी छाप छोड़ने के लिए आम जनता की वेशभूषा और और रहन - सहन पे विशेष ध्यान दिया ,जिसमे स्टेशन में अखबार बिछा के सोने से लेकर ठण्ड के दिनों में मफलर पहनने तक सब - कुछ शामिल था।  मैंने इतिहास की किताब में पढ़ा था की गांधी जी अपने शुरुआती दिनों में जब भाषण देने जाते तो कोट और पैंट  धारण किया करते थे। एक बार जब उन्होंने एक सभा में वस्त्र के विषय में टिपण्णी की तो उन्हें प्रथम स्वयं के वस्त्रो का ज्ञान हुआ उन्हें लगा की जबतक आम आदमी की वेशभूषा नहीं धारण करते तब तक  आम आदमी उनसे जुड़ाव नहीं महसूस कर सकता उस समय धोती भारत में पुरुषो की प्रमुख परिधान हुआ करती थी परन्तु उसमे भी कई किस्म थे जो की अत्यंत महंगे थे ,चरखा एक प्रसिद्ध वस्त्र  उत्पादक यंत्र था जो की घर - घर में उपलब्ध था। इसलिए गांधी जी ने निश्चय किया की वे खुद के चरखे से बनाया हुआ धोती ही पहनेंगे व वही उनका एक मात्र वस्त्र होगा। क्योंकि भारत जैसे विशाल देश में जहा की अधिकाँश जनता गरीबी में अपना जीवन यापन करती है और जिन्हे तन पे लपेटने हेतु पूर्ण वस्त्र भी उपलब्ध नहीं है वहा वह कैसे पूर्ण वस्त्र पहन सकते है। 

हालांकि अरविन्द केजरीवाल और गांधी जी में दूर दूर तक कोई समानता नहीं है फिर भी आम जनमानस को वस्त्र से जुड़े इस तथ्य को जानना आवश्यक है। और जो लोग गांधी जी को लेकर प्रश्नचिन्ह खड़ा किये रहते है उनसे मैं इतना ही कहना चाहूंगा की एक बार फेसबुक और व्हाट्सअप छोड़ के इतिहास की प्रामाणिक किताबों का अध्ययन करले। 
अन्ना के आंदोलन में अरविन्द केजरीवाल के साथ उनका एन जी ओ - इंडिया अगेंस्ट करप्शन भी सुर्खियों में था इसके नाम ने भी जनता पर सकारात्मक असर डाला मोदी  के उदय की संभावना को इस आंदोलन ने जैसे रोक ही दिया था और इसका सारा श्रेय भुनाने में अरविन्द केजरीवाल सफल हुए।  उन्होंने कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों को एक जैसी बताया उनकी बातों में आम आदमी की झलक मिली और उन्होंने इसी नाम से पार्टी की स्थापना की घोषणा करदी। 

हालांकि अन्ना ने उनकी मंशा पे शंका जाहिर की परन्तु फिर भी वे अन्ना को विश्वास में लेने में कामयाब हुए।  उन्होंने अपनी पार्टी और उसके प्रतिनिधियों के विषय में राजनीति से इतर बातें की और आम आदमी से दिखने वाले चेहरे को उम्मीदवार बनाया और खुद भी खड़े हुए चुनावों में पूर्ण बहुमत तो नहीं मिला पर पार्टी ने उम्मीद से ज्यादा सीट हासिल की दिल्ली का चुनाव होने के कारण सन्देश देश के कोने - कोने में गया। 
बीजेपी  के हाथ से लोकसभा चुनाव खिसकते हुए दिखाई दिया। परन्तु कहते है सत्ता  अच्छे - अच्छो का मतिभ्रम कर देती है। और अरविन्द केजरीवाल  ने कांग्रेस से समर्थन लेकर जनता को आप की नीयत और अरविन्द केजरीवाल की कथनी और करनी के विषय में सोचने पे मजबूर किया क्योंकि कांग्रेस के समर्थन का प्रश्न पूछे जाने पर अरविन्द केजरीवाल ने अपने बच्चो तक की कसमे  खा ली थी।  लोकसभा चुनाव में हुई हार से जल्द ही उन्हें इस बात की समझ आ गई और उन्होंने 45 दिनों में अनिल कपूर के नायक फिल्म की तरह एक बार फिर अपनी छाप जनता पर छोड़ी और 45 दिन बाद कांग्रेस को भी छोड़ दिया।  उनके कामो से दिल्ली  के निचले तबके के लोगो ने पुलिस और प्रशासन के उत्पीड़न से राहत महसूस किया और अगली बार उनको एक बार फिर दिल्ली का ताज सौंप दिया। 

परन्तु सत्ता और लालच   के खेल में अरविन्द केजरीवाल के विधायक से लेकर मंत्री तक  लगातार विवादों में बने हुए है। दूसरो पे आरोप लगाने वाली पार्टी  पे इस समय एक के बाद एक इतने आरोप है की पिछ्ला आरोप छोटा पड़ जाये और यदि यहां उन आरोपों का जिक्र किया जाए तो शायद कई पृष्ठ लग जाए। फिलहाल ताजा आरोपों में २० विधायकों का निलंबन और इन सीटों पर होने वाले चुनाव ही आप पार्टी का राजनीतिक भविष्य तय करेंगी की पार्टी पर जनता का विश्वास कितना बना हुआ है।  

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      मुद्दा और ज़िन्दगी 


                           
mudda
रायजी 


  • Kya hua fir raat ho gai Bina kisi baat ki.mudde wo nahi rahte jinse Zindagi aasan hoti hai.mudde wo rahte Hai jinke hone se Zindagi aasan ho jayegi.jo kabhi pure nahi hote.

  • mudde he to Hai hamari Zindagi me Baki Zindagi kaha bachti hai ab.paida hue tab se mudde suru ho jate Hai marne ke baad bhi mudde peechha nahi chhodte ab Mahatma Gandhi se leker Nehru tak ko dekh lijiye.bechare Mahatma Gandhi ki murder ki file dubara khul rahi Hai.nehru ke decision ko galat sahi bataya ja Raha Hai per apne kuch nahi Kiya ja Raha Hai.koi pappu ban baitha to koi fenku per enke siwa koi gental man bhi to nahi dikhai deta maidan me.kaam to enhi se chalana padta Hai bechari Bharat MAA ko.aakhir koi n koi mudda to chahiye jeene ke liye.aur.......



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